सोमवार, 23 मार्च 2026

हम हमारे

 
हम हमारे 
और उनके लिए 
जरुरी कौन 

मजहब भी 
मतलब  व  जाति 
आखिर तक 

स्वार्थ उनका 
हमारी भक्ति शक्ति 
सब उनका। 

अस्तित्व तक 
जीवन से मरण 
अन्धविश्वास। 

शातिर युग 
कातर योद्धा जब 
लड़ेगा कौन ?


-डॉ लाल रत्नाकर 

विश्व को शान्ति

 

विश्व को शान्ति 
विषगुरु की क्रान्ति 
किसके साथ 

मित्र के साथ 
ठगी के व्यापारी 
कैसी लाचारी 

लोभी कपटी 
जनता से जुमले 
मित्रों के सगे। 

लोकतंत्र के 
दुश्मन तुम नहीं 
मनुवादी हो। 

यह संभव 
हो सकता है अब 
भक्त जनता। 

जब व्यापार 
भूख जनता भूखी 
लाभार्थी बन। 

ठगी धर्म हो 
धर्मान्धता परोस 
सत्ता हासिल। 

नया देश है 
नया ज्ञान अज्ञान 
परोसना है.

नाली से गैस 
थाली वाला इलाज़  
अज्ञान भाव। 

भक्तों स्वाभाव 
बदलो नहीं तुम
बचा पाओगे ?

अस्मिता हारी 
महामारी बिमारी 
सही तुम्हारी। 

विश्व शान्ति का 
वक़्त आ गया अब 
जितना भागो। 

-डॉ लाल रत्नाकर