सोमवार, 23 मार्च 2026

हम हमारे

 
हम हमारे 
और उनके लिए 
जरुरी कौन 

मजहब भी 
मतलब  व  जाति 
आखिर तक 

स्वार्थ उनका 
हमारी भक्ति शक्ति 
सब उनका। 

अस्तित्व तक 
जीवन से मरण 
अन्धविश्वास। 

शातिर युग 
कातर योद्धा जब 
लड़ेगा कौन ?


-डॉ लाल रत्नाकर 

विश्व को शान्ति

 

विश्व को शान्ति 
विषगुरु की क्रान्ति 
किसके साथ 

मित्र के साथ 
ठगी के व्यापारी 
कैसी लाचारी 

लोभी कपटी 
जनता से जुमले 
मित्रों के सगे। 

लोकतंत्र के 
दुश्मन तुम नहीं 
मनुवादी हो। 

यह संभव 
हो सकता है अब 
भक्त जनता। 

जब व्यापार 
भूख जनता भूखी 
लाभार्थी बन। 

ठगी धर्म हो 
धर्मान्धता परोस 
सत्ता हासिल। 

नया देश है 
नया ज्ञान अज्ञान 
परोसना है.

नाली से गैस 
थाली वाला इलाज़  
अज्ञान भाव। 

भक्तों स्वाभाव 
बदलो नहीं तुम
बचा पाओगे ?

अस्मिता हारी 
महामारी बिमारी 
सही तुम्हारी। 

विश्व शान्ति का 
वक़्त आ गया अब 
जितना भागो। 

-डॉ लाल रत्नाकर 
 


गुरुवार, 16 अक्टूबर 2025

वोट बिहार केचुआ चोरी कर पार्टी हो गया !



वोट बिहार
केचुआ चोरी कर
पार्टी हो गया !

देखना होगा
आगे आगे जनता
आक्रोश वहां !

संघ भाजपा
मोदी शाह नितीश
नहीं हैं साथ !

तेजस्वी लालू
राहुल के हमले
बिहार जीत !

कौन कितना
संवैधानिक होगा
देखना होगा।
 
- डॉ लाल रत्नाकर

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

"Happy Birthday, राजेश प्रभाकर 
कुछ ऐसे खास पल होते हैं जिन पर बहुत कुछ लिखा जा सकता है : डॉ लाल रत्नाकर" 

वाह आज ही
जन्मदिन है और
इतनी दूर।

मशहूर है
हमारे साथ साथ
उनका साथ।

हाथ में हाथ
हो हम सब आज
आपके साथ।

कैसी बात है ।
यह हमारी मांग
पूरी कैसे हो।

विचार मंच
पर संभव है क्या!
आज की शाम।

-डॉ लाल रत्नाकर

बुधवार, 15 अक्टूबर 2025

जग बीती हो तेरी जो भी रीति हो नीति नियति।

 


जग बीती हो
तेरी जो भी रीति हो
नीति नियति।

सब ज़ाहिर
तब होता है जब
ग़ौरतलब ।

वह अपने
आप क़रीब आते
जब फँसते ।

समय मेरा
तेरा मुरीद होता
कभी अगर ।

चलना वह
चाहता अगर तो
राह बहुत ।

डॉ लाल रत्नाकर

मंगलवार, 9 सितंबर 2025

दंश किसका वंश किसका कैसा मानवता का।

दंश किसका 
वंश किसका कैसा
मानवता का।

पूरी दुनिया 
पाशुता आचरण 
दिखता नहीं ।

सत्ता मद में 
अंधे हो,बहरे हो
या और कुछ।

पर इंसान 
नहीं हो सकते हो
प्रतिघात से।

सम्भल जाओ 
डर ने तुम्हें डरा
ही तो रखा है।

-डॉ लाल रत्नाकर
 

सोमवार, 25 अगस्त 2025

न समय हैं और न ही विषय बातचीत का !


 न समय हैं
और न ही विषय 
बातचीत का  !

अपने ही हैं
इतने सारे सपने 
तारे तोड़ना !

नहीं जोड़ना 
अब किसी गॉठ को 
पड़ी है कैसे ?

नहीं सोचना
पतन पुराण पर
इस युग में !

हठधर्मी हूँ 
गठबंधन मेरा
पाखंडी से है !

डॉ लाल रत्नाकर

रविवार, 24 अगस्त 2025

तुम कौन हो मेरा नाम बताओ काटा ही क्यों है ।


तुम कौन हो 
मेरा नाम बताओ 
काटा ही क्यों है ।

झूठे मक्कार
कायर तड़ीपार 
तुम कौन हो !

बाबा साहब 
जानते थे चरित्र 
तुम्हारा कुल !

इसलिए ही
लिखा है संविधान 
नहीं मानते ?

मनुवादियों
दिल पर पत्थर 
रख मानो न !

डॉ लाल रत्नाकर

गधे नहीं है घोड़े हैं दिखते हैं गधे समान !

 


गधे नहीं है 
घोड़े हैं दिखते हैं 
गधे समान !

तस्वीर शौक 
नक़ली सूरत है 
समझदार !

दुनिया भर
में घूमा हुआ हूँ मैं 
चोरी करके ।

वोट की नहीं
नोट की भी कितनी 
गिनती नहीं !

भ्रम उनका
श्रम मेरा कितना 
किसको पता ?

डॉ लाल रत्नाकर

अभिमान ना सम्मान बहुत हो इंसान वही ।


अभिमान ना
सम्मान बहुत हो
इंसान वही ।

जग ख़ाली है
समय बवाली है
अज्ञान पूर्ण ।

वह विगत 
वर्तमान जिनका
महान सदा ।

संस्कार मिला
सम्पदा असली है
बाक़ी नकली ।

आशीर्वाद है 
जिनका सानिध्य  ही
पहचान हो !

डा.लाल रत्नाकर