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दीर्घा
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मंगलवार, 9 सितंबर 2025
दंश किसका वंश किसका कैसा मानवता का।
दंश किसका
वंश किसका कैसा
मानवता का।
पूरी दुनिया
पाशुता आचरण
दिखता नहीं ।
सत्ता मद में
अंधे हो,बहरे हो
या और कुछ।
पर इंसान
नहीं हो सकते हो
प्रतिघात से।
सम्भल जाओ
डर ने तुम्हें डरा
ही तो रखा है।
-डॉ लाल रत्नाकर
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