सोमवार, 21 जुलाई 2025
गगन धरा रह गया है यहां सब विनशा।
गगन धरा
रह गया है यहां
सब विनशा।
काल लाल हो
जंग किससे तेरी
तय हो चुका!
अब हमारे
तुम्हारे लिए कुछ
जरूरी नहीं।
यह मुकाम
पा लिया है उसने
मुश्किल तेरा।
-डॉ लाल रत्नाकर
शनिवार, 19 जुलाई 2025
तेरे राज्य में
कौन सुरक्षित है
बताओ जरा !
तुम्हारे साथी
जो जो अपराधी हैं
उनके सिवा !
बहुत सारे
अपराधी बैठे हैं
तुम्हारे यहाँ !
कल तक तो
तुम्हारे बयानों में
जो जो आते थे !
वह लुटेरे
जिन्हें तुम पाले हो
सरकारों में !
-डॉ लाल रत्नाकर
बुधवार, 25 जून 2025
बुधवार, 18 जून 2025
जज साहब सुनो बोल रहे हैं सच या झूठ !
मामला घूस
अन्याय या न्याय का
किसको पता !
अन्याय या न्याय का
किसको पता !
आज कल का
अजीबो गरीब है
हाल या चाल !
वकीलों बता
ये न्याय का व्यापार
अब कैसा है !
तब कैसा था
न्याय की उम्मीद
आमजन को !
-रत्नाकर
सोमवार, 16 जून 2025
वह लड़की साहसी और तेज़ समझदार !
वह लड़की
साहसी और तेज़
साहसी और तेज़
समझदार !
अभी वह है
उधेड़बुन फसी
भविष्य कहाँ !
ढूढ़ रही है
उज्जवल भविष्य
प्रगति मार्ग !
लेकिन कहाँ
सहज है भविष्य
इस समय !
जातिवाद का
वर्ण वर्ग धर्म का
हथियार हो !
रविवार, 15 जून 2025
दुनिया भर अपमान सहना आसान नहीं।
क्या लाया लाला
किसका सिंदूर यहां
विधवाओं को।
तुम्हें बताएं
तेरा सच सच है
कौन बताए।
तुमने रचा
हत्या कर कराके
चुनाव हेतु।
अभियान से
तो एसा ही लगता
सबने जाना।
समय साथ आस पास जिसके गुजारता हो।
वह करीब
कितना गरीब है
पता चलता।
नसीब मेरा
करीब उसके था
यदि जानता।
समय मिला
तब कर गुजरा
काम तमाम।
बहुत दूर
निकल जाना जब
करीब आना।
-रत्नाकर
शनिवार, 14 जून 2025
समय बोल सच सच के बोल निडर बन।
समय बोल
सच सच के बोल
निडर बन।
सच सच के बोल
निडर बन।
खड़ा रहता
सूखा हुआ वृक्ष भी
आंधियों तक।
डगमग में
हंसी होगी जग में
संभलकर।
उड़ाना मत
अपनी ताकत को
चमत्कार में।
अंधविश्वास
पाखंड मत कर
डरकर भी।
-डॉ लाल रत्नाकर
समय साथ आस पास जिसके गुजारता हो।
समय साथ
आस पास जिसके
गुजारता हो।
आस पास जिसके
गुजारता हो।
वह करीब
कितना गरीब है
पता चलता।
नसीब मेरा
करीब उसके था
यदि जानता।
समय मिला
तब कर गुजरा
काम तमाम।
बहुत दूर
निकल जाना जब
करीब आना।
-रत्नाकर
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