शनिवार, 23 अगस्त 2025

मुझे कहना चोर मत कहना तड़ीपार हूँ।


(1)
मुझे कहना 
चोर मत कहना  
तड़ीपार हूँ। 
(2)
संसद में ही 
तड़ीपार बोलना 
वाजिब कैसे !
(3)
नहीं बोलना 
सच को सच अब 
झूठे हैं यहाँ !
(4)
किस ब्रांड की 
वाशिंग मशीन है 
बीजेपी घर !
(5)
जो धो देती है 
भ्रष्टाचार के पाप 
अंदर आते !

-डॉ लाल रत्नाकर

मन महके जग जड़ता भूत आलिंगन से ।



मन महके
जग जड़ता भूत
आलिंगन से ।

परिभाषित
करते अनुचित
विचार अब।

कारागार में
जन्मदिन मनाने
कौन गया था।

किसके साथ
दुनिया चली आई
दर्शनार्थियों!

शातिर लोग
बहुत सी चालाकी
बरतते हैं !

डॉ लाल रत्नाकर

बुधवार, 6 अगस्त 2025

वक़्त के संग रंग बदल रहा जिन जिन का!

 मुझे लगता है कि जिन लोगों ने या जिसने इस विधा का आविष्कार किया होगा वह बहुत ही तार्किक और प्रासंगिक रहा होगा और उसके समय में भी बहुत-बहुत भयावह परिस्थितियां रही होगी कम शब्दों के माध्यम से गंभीर बात कह देना आमतौर पर जो बड़े-बड़े भाषणों से संभव नहीं होता। 

वह विधा है हाईकू गौर फरमाइए-


वक़्त के संग
रंग बदल रहा 
जिन जिन का!

चेतावनी दी
विदक गया वह
नफरती जो।

कौन लाया है 
पता चल गया ना 
कारण है जो।

आम आदमी 
हिम्मत ना करेगा 
बगावत का!

खास आदमी 
वाहियात तकाजा 
झेल रहा हो !

-डॉ लाल रत्नाकर

बुधवार, 23 जुलाई 2025

बुरे दौर में, झूठ बोलने वाले, कौन कौन हैं?


बुरे दौर में 
झूठ बोलने वाले 
कौन कौन हैं?

कुछ लोगों ने 
किया होगा बिलाप 
कौन है वह?

पहचान के 
कोई प्रतिमान है 
संविधान में?

मनुस्मृति में 
तो लिखा है बहुत 
अमानवीय !

कौन पढ़ेगा 
यह किसने रचा
किसके लिए?

- डॉ लाल रत्नाकर

सोमवार, 21 जुलाई 2025

गगन धरा रह गया है यहां सब विनशा।


गगन धरा
रह गया है यहां
सब विनशा।


काल लाल हो
जंग किससे तेरी
तय हो चुका!


अब हमारे
तुम्हारे लिए कुछ
जरूरी नहीं।


यह मुकाम
पा लिया है उसने
मुश्किल तेरा।


-डॉ लाल रत्नाकर

शनिवार, 19 जुलाई 2025

तेरे राज्य में


 

तेरे राज्य में
कौन सुरक्षित है
बताओ जरा  !

तुम्हारे साथी
जो जो अपराधी हैं 
उनके सिवा !

बहुत सारे 
अपराधी बैठे हैं 
तुम्हारे यहाँ !

कल तक तो 
तुम्हारे बयानों में 
जो जो आते थे !

वह लुटेरे
जिन्हें तुम पाले हो 
सरकारों में !

-डॉ लाल रत्नाकर 


बुधवार, 25 जून 2025

कौन कहता इतना खुलकर मुंह पर यूं।



 
 
कौन कहता
इतना खुलकर
मुंह पर यूं।
 
समझने में
देर नहीं की होगी
तो‌ उसने भी।
 
यही तो फर्क
महसूस होता है
उनमें तभी।
 
आमतौर पे
आदमी आदमी भी
रह गया क्या। 
 
समझ आता
इतनी रहबरी
तो कैसे होती।
 
डॉ लाल रत्नाकर

बुधवार, 18 जून 2025

सबका साथ उनका विनाश है जो जो साथ हैं !


सबका साथ 
उनका विनाश है 
जो जो साथ हैं !

यदि वह हैं 
दलित पिछड़े या 
अल्पसंख्यक !

किसका साथ 
पूंजीपतियों का या 
आमआदमी !

आत्मनिर्भर 
नाली की गैस जला  
चाय बेचते !

प्रतीक कैसा 
अंधविश्वास का या 
चमत्कार का !

-रत्नाकर

जज साहब सुनो बोल रहे हैं सच या झूठ !

 


जज साहब 
सुनो बोल रहे हैं 
सच या झूठ !

मामला घूस 
अन्याय या न्याय का 
किसको पता !

आज कल का 
अजीबो गरीब है 
हाल या चाल !

वकीलों बता 
ये न्याय का व्यापार 
अब कैसा है !

तब कैसा था 
न्याय की उम्मीद 
आमजन को  !

-रत्नाकर

सोमवार, 16 जून 2025

वह लड़की साहसी और तेज़ समझदार !



वह लड़की 
साहसी और तेज़
समझदार !

अभी वह है 
उधेड़बुन फसी 
भविष्य कहाँ !

ढूढ़ रही है 
उज्जवल भविष्य 
प्रगति मार्ग !

लेकिन कहाँ 
सहज है भविष्य 
इस समय !

जातिवाद का 
वर्ण वर्ग धर्म का       
हथियार हो !  

- डॉ लाल रत्नाकर