सब ज़ाहिर
तब होता है जब
ग़ौरतलब ।
वह अपने
आप क़रीब आते
जब फँसते ।
समय मेरा
तेरा मुरीद होता
कभी अगर ।
चलना वह
चाहता अगर तो
राह बहुत ।
डॉ लाल रत्नाकर
मुझे लगता है कि जिन लोगों ने या जिसने इस विधा का आविष्कार किया होगा वह बहुत ही तार्किक और प्रासंगिक रहा होगा और उसके समय में भी बहुत-बहुत भयावह परिस्थितियां रही होगी कम शब्दों के माध्यम से गंभीर बात कह देना आमतौर पर जो बड़े-बड़े भाषणों से संभव नहीं होता।