जग ख़ाली है
समय बवाली है
अज्ञान पूर्ण ।
वह विगत
वर्तमान जिनका
महान सदा ।
संस्कार मिला
सम्पदा असली है
बाक़ी नकली ।
आशीर्वाद है
जिनका सानिध्य ही
पहचान हो !
डा.लाल रत्नाकर
मुझे लगता है कि जिन लोगों ने या जिसने इस विधा का आविष्कार किया होगा वह बहुत ही तार्किक और प्रासंगिक रहा होगा और उसके समय में भी बहुत-बहुत भयावह परिस्थितियां रही होगी कम शब्दों के माध्यम से गंभीर बात कह देना आमतौर पर जो बड़े-बड़े भाषणों से संभव नहीं होता।